Story of A P J Abdul Kalam डॉ अब्दुल कलाम के प्रेरक प्रसंग

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Story of A P J Abdul Kalam

Story of A P J Abdul Kalam डॉ अब्दुल कलाम के प्रेरक प्रसंग

 

डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम , जिनकी सादगी और महानता के बारे में सुनकर आँखें नम हो जाती है. लगता है कोई इतना शालीन और इतने गुणों वाला एक ही इंसान कोई कैसे हो सकता है. अगर हमे इनके जैसा बनना है तो अपने अन्दर बहुत सफाई करनी होगी.

मै चाहता हूँ , मै और आप सब इन्ही की तरह बन पाए. आइये हम जानते है कुछ डॉ कलाम के जीवन से जुडी कहानियाँ जिन्हें हम सिर्फ पढ़े ही नहीं बल्कि अपने जीवन में उतार भी पाए.

 

# 1 . डॉ कलाम जब वैज्ञानिक के रूप में कार्य करते थे ..

 

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जब वैज्ञानिक के रूप में कार्य करते थे तो एक दिन उनके साथ काम करने वाले व्यक्ति ने थोड़ी देर पहले छुट्टी मांगी जिस से वह अपने बच्चो को शाम में प्रदर्शनी घुमाने ले जा सके. डॉ कलाम ने हां कर दी लेकिन काम में व्यस्त वह व्यक्ति समय पर घर जाना भूल गया. जब देर रात वह घर पंहुचा तो उसे पता चला डॉ एपीजे अब्दुल कलाम स्वंय उसके बच्चो को प्रदर्शनी घुमा लाये थे.

 

# 2 . जब डॉ कलाम DRDO में थे ..

 

जब डॉ कलाम DRDO में थे तब वहाँ की दीवारों पर सुरक्षा के चलते कांच लगाने का प्रस्ताव आया. लेकिन एपीजे अब्दुल कलाम ने यह प्रस्ताव इस लिए मना कर दिया की वह इन्सान की सुरक्षा के लिए पक्षियों को किसी भी प्रकार की तकलीफ नहीं पहुचाना चाहते थे.

 

# 3 . बच्चो को सम्बोधित करते हुए ..

 

एक बार डॉ कलाम एक विद्यालय में बच्चो को मंच से सम्बोधित कर रहे थे लेकिन कुछ तकनीकी खराबी के चलते माइक बंद हो गया. जिसके बाद डॉ कलाम मंच से उतर कर बच्चो के बीच चले गये और बिना माइक के 400 बच्चो से रूबरू हुए.

 

# 4 . बच्चे को जबाब ..

 

एक बार 6th क्लास के बच्चे ने डॉ एपीजे की किताब को पढ़ते हुए उनका चित्र बनाया. सभी ने वह चित्र डॉ कलाम को भेजने को कहा लेकिन बच्चे को लगा वह अगर भेज भी देगा तो कौन सा ये उनके पास तक पहुचेगा. किन्तु सबके जिद करने पर उस बच्चे ने वह चित्र डॉ कलाम को भेजा. जिसके कुछ समय बाद उस बच्चे को Sign किया हुआ डॉ कलाम का THANK YOU नोट मिला.

 

# 5 . कलाम के दो दोस्त ..

 

राष्ट्रपति बनने के बाद केरल राज भवन में एक आयोजन किया गया. जहाँ डॉ कलाम को अपने साथ दो लोगो को बुलाने का अधिकार था. उन्होंने अपने साथ किसी नेता या रिश्तेदार की बजाय .. एक मोची और एक छोटे से होटल में काम करने वाले को बुलाया. जिसका कारण , अब्दुल कलाम का हमेशा देश के आम आदमी को ऊपर मानना था.

 

# 6 . IIT के मुख्या अतिथि ..

 

एक बार दीक्षांत समारोह के दौरान एपीजे अब्दुल कलाम को मुख्या अतिथि के रूप में बुलाया गया. जब वह वहा पहुचे तो उन्होंने देखा उनकी कुर्सी बाकी सारी कुर्सियों से बड़ी है. जिसके बाद उन्होंने उस कुर्सी पर बैठने से मना कर दिया और उनके लिए भी सबके जैसी कुर्सी लायी गयी.

 

# 7 . सम्पत्ति दान ..

 

जब कोई राष्ट्रपति बन जाता है तो सरकार उसकी सभी जरुरतो का ध्यान रखती है. ऐसे में एपीजे अब्दुल कलाम ने रास्त्रपति बनने के बाद सारी संपत्ति Providing Urban amenities in Rural Areas (PURA) initiative को दान कर दी.

 

# 8 . एक रात पहले ही आयोजन में पहुचे ..

 

जब डॉ कलाम DRDO में थे तब उन्हें एक कॉलेज के आयोजन में मुख्या अतिथि के रूप में जाना था. कलाम ने न्योता ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार किया. लेकिन वह उस जगह पर एक रात पहले ही पहुच गये. उनका कहना था , इस आयोजन के पीछे कठिन मेहनत करने वालो से मिलना भी उनके लिए जरुरी था जिसके लिए उन्होंने इस समय चक्कर लगाया.

 

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जैसे व्यक्तित्व का इस धरती पर जन्म लेना भारत के लिए गौरव की बात है. हम उन्हें शत शत नमन करते है.

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