Rahim Ke Dohe in Hindi | रहीम के दोहे शब्दार्थ सहित

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Rahim Ke Dohe
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Rahim Ke Dohe in Hindi

रहीम के दोहे (Rahim Ke Dohe) हम सभी ने अपने बचपन में कई कक्षाओं में पढ़े है. शायद महान कवि Rahim ke dohe याद करने के पीछे हम पीटे भी हों या आपने भी डाट खायी हो. Rahim ke dohe का हमारे जीवन में बेहद महत्व है लेकिन बदलती जीवनशैली के कारण सभी इन्हे भूलते जा रहे है.

जीवन को आसान और उपयोगिता समझाने वाले Rahim ke dohe चाय में डाली गयी शक्कर के जैसे है , जो थोड़ी सी डालने पर ही पूरी चाय को मीठा कर देते है. Rahim Ke Dohe अनंत काल तक ऐसे ही सभी जीवन को प्रकाशित करते रहेगे इसमें कोई शक नहीं है.यह हमेशा ही उतने महत्वपूर्ण रहेगे जितने अकबर के समय में थे.

आइये आज साथ में समझते है Rahim ke dohe का अर्थ.

दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय ।
  जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे होय ।

अर्थ : रहीम दास जी  कहते है , हर व्यक्ति दुःख के समय में प्रभु को याद करता है इश्वर की आराधना करता है अपने कष्टों को मिटाने के लिए जगह जगह माथा टेकता है लेकिन जब वह सुख में होता है तब उसे इश्वर अल्लाह प्रभु और भगवान ध्यान नहीं रहते. यदि सुख में भी हमे भगवान ध्यान रहे तो हमें कोई दुःख ही न हो !

जो बड़ेन को लघु कहें, नहीं रहीम घटी जाहिं ।
  गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुःख मानत नाहिं ।

अर्थ : इस दोहे में संत रहीम दास  ने अपने शब्दों को बड़ी सुन्दरता के साथ पिरोते हुए कहा है , किसी भी बड़े या महान व्यक्ति को छोटा कहने से उसकी महानता या बड़प्पन कम नहीं हो जाता जिस प्रकार गिरधर को कन्हैया या मुरलीधर कहने पर उनके गौरव में कोई कमी नही आती.

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि ।
  जहां काम आवे सुई, कहा करे तरवारि ।

अर्थ : रहीम दास जी कहते है , किसी भी बड़ी चीज को देखने या पा लेने से छोटी चीज को फेंकना नहीं चाहिये.क्यूंकि जो काम छोटी सुई से किया जा सकता है वह काम तलवार नहीं कर सकती. यानी हर चीज की अपनी अलग उपयोगिता है फिर चाहे वह आकार में बड़ी हो या छोटी.

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय ।
  टूटे पे फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परी जाय ।

अर्थ : रहीम दास जी यहा रिश्ते की तुलना धागे से करते हुए उपयोगिता को दर्शाते है की , प्रेम का रिश्ता धागे के समान होता है जिसे तोडना नही चाहिये. एक बार धागा टूट जाने के बाद बिना गाँठ बांधे नही जोड़ा जा सकता उसी प्रकार टुटा रिश्ता भी जुड़ना मुश्किल होता है जिसमे दरार हमेशा के लिए बनी ही रहती है.

रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार ।
  रहिमन फिरि-फिरि पोइए, टूटे मुक्ताहार ।

Rahim ke dohe | अर्थ : यदि कोई हार टूट जाए तो उसके हीरे और मोतियों को दूसरे धागे में पिरो कर ठीक कर लेना चाहिये. वैसे ही अगर कोई प्रियजन आपसे सौ बार भी रूठ जाता है तो उसे हमेशा मना लेना चाहिये.

दोनों रहिमन एक से, जों लों बोलत नाहिं ।
  जान परत हैं काक पिक, रितु बसंत के माहिं ।

अर्थ : रहीम दास जी कहते है , कौया और कोयल दोनों ही एक समान रूप से काले होते है. जब तक दोनों बोलने के लिए अपना मुंह नहीं खोलते तब तक दोनों में कोई फरक मालूम नहीं पड़ता लेकिन जैसे ही बसंत ऋतु का आगमन होता है वैसे ही कोयल की मधुर आवाज हर जगह गूंजने लगती है.

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग ।
  चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग ।

अर्थ : रहीम दास जी कहते है , जिस मनुष्य की प्रकृति अच्छी है व्यवहार अच्छा है वह कैसी भी संगती में रह ले उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जिस प्रकार चन्दन पर विषैले सांप हर समय लिपटे रहते है लेकिन चन्दन की प्रकृति पर प्रभाव नही डाल पाते.

समय पाय फल होत है, समय पाय झरी जात ।
  सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछितात ।

अर्थ : रहीम दास जी कहते है , परेशानी के समय में घबराना या पछताना व्यर्थ है. जिस प्रकार बसंत ऋतु के आते ही सभी पेड़ फल से सजे हुए नजर आये है और शरद ऋतु के आते ही सभी मुरझा जाते है. ऐसे ही कभी भी परिस्थितियाँ एक जैसी नहीं रहती.

खीरा सिर ते काटि के, मलियत लौंन लगाय ।
  रहिमन करुए मुखन को, चाहिए यही सजाय ।

अर्थ : रहीम दास जी कड़वा बोलने वाले व्यक्ति की तुलना खीरे से करते हुए कहते है , जिस प्रकार खीरे को कडवा होने के कारण ऊपर से काट कर साफ़ किया जाता है उसी प्रकार कडवा बोलने वाले मनुष्य को भी ऐसी ही सजा मिलती है.

रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय ।
  सुनी इठलैहैं लोग सब, बांटी न लेंहैं कोय ।

अर्थ : रहीम दास जी कहते है , अपनी परेशानियों और तकलीफों को किसी दूसरे के साथ साझा करने से अच्छा है अपने मन में ही दबा कर रखे क्योंकि दूसरो की परेशानियां सुनने के बाद लोग ऊपर से भले ही दुःख जाहिर कर दे लेकिन दुःख बाटने वाला कोई नहीं होता.

रहिमन अंसुवा नयन ढरि, जिय दुःख प्रगट करेइ ।
  जाहि निकारौ गेह ते, कस न भेद कहि देइ ।

Rahim ke dohe | अर्थ : जिस प्रकार आँखों से निकले आंसू दिमाग में चल रही परेशानी या पीड़ा को व्यक्त करते है उसी प्रकार घर से निकाला गया व्यक्ति ही घर के सारे राज या भेद बाहर जा कर खोलेगा.

तरुवर फल नहीँ खात हैं, सरवर पियहि न पान ।
  कही रहीम पर काज हित, संपति संचही सुजान ।

अर्थ : रहीम दास जी कहते है , जिस प्रकार पेड़ और पौधे अपने फल फूल खुद नहीं खाते या खुद नही उपयोग करते उसी प्रकार सज्जन पुरुष भी दूसरों की सहायता और तकलीफों के लिए अपना जीवन और दौलत खर्च करते है.

जे गरिब सों हित करें, ते रहीम बड़ लोग ।
  कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग ।

अर्थ : रहीम दास जी सुदामा और कान्हा की दोस्ती को उधाहरण देते हुए कहते है , जो लोग किसी गरीब के हित में है वे सभी महान है. जैसे कान्हा की दोस्ती भी एक भक्ति है.

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर ।
  पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर ।

Rahim ke dohe | अर्थ : बड़ा होने का मतलब यह नही होता की वह अच्छा है जैसे खजूर का पेड़ आकर में बेहद लम्बा होता है लेकिन उस पर से फल तोड़ने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है साथ ही साथ वह पेड़ किसी के लिए छाया नही देता.

रहिमन चुप हो बैठिये, देखि दिनन के फेर ।
  जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर ।

अर्थ : दास जी कहते है , जब समय खराब चल रहा हो तो चुप बैठना ही समझदार की निशानी है चूँकि जब अच्छा समय आता है तो सभी काम अपने आप बनने लगते है.

जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह ।
  धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह ।

अर्थ : रहीम दास जी कहते है , जिस प्रकार इस धरती पर धुप , बारिश , मिटटी सब गिरती है और वह चुप चाप सेहन करती है उसी प्रकार मनुष्य को बनना चाहिये और सुख दुःख भोगने की आदत डालनी चाहिये.

रहिमन मनहि लगाईं कै, देख लेहूँ किन कोय ।
  नर को बस करिबो कहा, नारायण बस होय ।

अर्थ : रहीम दास जी कहते है , यदि मन को एक ही जगह पर रख कर काम किया जाये तो सब मुश्किलें हल की जा सकती है. जिस प्रकार इश्वर की सच्चे मन से आराधना करने पर उन्हें भी अपने वश में किया जा सकता है.

बानी ऐसी बोलिये, मन का आपा खोय ।
  औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय ।

Rahim ke dohe | अर्थ : अपने भीतर छुपे अहंकार को हटा कर ऐसी बात कहनी चाहिये जिसे सुनकर दूसरे व्यक्ति को शांति और ख़ुशी का अनुभव हो. यदि हम मीठे बोल बोलेगे तो वह बात हमारे लिए भी फायदेमंद होगी और सुनने वाले के लिए भी.

तो यह थे अकबर के नौ रत्नों में से एक रहीम के दोहे (Rahim Ke dohe). हम आशा करते है इन प्रेरणादायक दोहों से आपको बहुत कुछ सीखने को मिला होगा. यदि आपको Rahim ke dohe पसंद आये हो तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना भूले. साथ ही कोई भी प्रश्न या अन्य रहीम के दोहे (Rahim ke dohe )आप हमे देना चाहते हो तो वह भी आप नीचे comment box में हमे बता सकते है.

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