How Pandavas Died | महाभारत युद्ध के बाद आगे क्या हुआ ?

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How Pandavas Died
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How Pandavas Died

मानव इतिहास में हुआ सबसे बड़ा धर्मयुद्ध महाभारत जिसमे भारत के लगभग 80% पुरुष मारे गये. 18 दिन तक चले इस युद्ध में कौरव और पांडव आमने सामने थे जिसके अंत में पांडवों ने कौरवों को हरा कर अपने अधिकार प्राप्त किये. लेकिन इसके बाद पांडवों का क्या हुआ ? श्री कृष्ण की म्रत्यु कैसे हुयी ? द्रौपदी के साथ क्या हुआ ? पांडवों ने कितने समय तक राज किया ? कलयुग कब से शुरू हुआ ? ऐसे अनेकों सवालों के जबाब हमे किसी किताब में नही दिए जाते.

How Pandavas Died लेख में आज हम बात करेगे कुछ ऐसे ही सवालों पर जिनके जबाब साधारणतः किताबों और किस्सों में नही दिए जाते. How Pandavas Died शुरू करने से पहले हम आपको बता दे यदि आपके पास भी इस से जुडी अन्य जानकारी मौजूद है और आप हमारे साथ इसे साझा करना चाहते है तो आप हमे कमेंट बॉक्स या फिर How Pandavas Died सब्जेक्ट के साथ मेल कर सकते है.

How Pandavas Died में सबसे पहले बात करते है युद्ध के बाद हस्तिनापुर सिंहासन पर कौन बैठा ?

कुरुक्षेत्र में युद्ध जीतने के बाद हस्तिनापुर का राजपाट युधिष्ठिर को सौंपा गया. लेकिन गन्धारी ने श्रीकृष्ण को श्राप दिया की उनके यदुवंश का नाश भी एक दिन निश्चित ही होगा.जिसके बाद यदुवंशियों ने 36 सालों तक हस्तिनापुर पर राज किया लेकिन गन्धारी के श्राप के चलते एक समय ऐसा भी आया जब यदुवंशी आपस में ही एक दूसरे को मारने काटने पर उतारू हो गये.

भगवान् श्रीकृष्ण की म्रत्यु एक शिकारी द्वारा उनके पाँव में तीर लगने के कारण हुयी. कृष्ण के शरीर में एकमात्र वही स्थान था जहाँ की पीड़ा उनके प्राण हर सकती थी. जिसके बाद द्वापर युग अपने अंत समय पर आ गया. श्रीकृष्ण की म्रत्यु के बाद ऋषि वेद व्यास ने पांडवों को बताया की उनके जन्म का उद्देश्य अब ख़त्म हो चूका है.

वेद व्यास की बात सुन कर युधिष्ठिर ने अपना राज्यभार पौत्र को सौंपने का निर्णय लिया और सभी पांडव द्रौपदी संग स्वर्ग की ओर चल दिए. जिसमे उनके साथ एक कुत्ता भी गया.

एक एक करके रास्ते में ही पांड्वो की म्रत्यु होने लगी. जिसमे सबसे पहले द्रौपदी की म्रत्यु हुयी और अंत में भीम की.युधिष्ठिर और कुत्ते के आलावा कोई भी स्वर्ग तक नहीं पहुच सका.

कहा जाता है की , वह कुत्ता स्वर्ग के दरवाजे पर यम के रूप में प्रकट हुआ और युधिष्टिर को नरक में मौजूद द्रोपदी व अन्य पांड्वो के पाप का चीठ्था दिखया जिसमे उन्होंने बताया की वह सभी अपने पाप के प्रायश्चित के बाद स्वर्ग में आ जायेगे.

श्रीकृष्ण और पांड्वो के इस संसार से विदा लेने के बाद द्वापर युग का अंत और कलयुग की शुरुआत हुयी.

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